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पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² : इन बातों का हर मां को रखना चाहिठधà¥à¤¯à¤¾à¤¨
“चाइलà¥à¤¡ बरà¥à¤¥ के पहले छह सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ पà¥à¤°à¤¸à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° अवधि (Postpartum period) होती है। इस पीरियड को सेंसिटिव माना जाता है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ और डिलिवरी के बाद महिलाओं में नींद की कमी, हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² चेंजेस, बॉडी शेप बदलना आदि देखने को मिलता है। इसलिठपà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) के लिठमहिलाओं को सवा महीने तक आराम करने के लिठकहा जाता है।†ये कहना है डॉ मालती पांडेय (गायनोकोलॉजिसà¥à¤Ÿ, जयती कà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¿à¤•, लखनऊ) का। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने “हैलो सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯â€ से बात करते हà¥à¤ ये जानकारी दी।
शिशॠके जनà¥à¤® के बाद, महिला की देखà¤à¤¾à¤² के लिठउतà¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ में à¤à¤• परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गोंद के लडà¥à¤¡à¥‚ (जिसमें कई तरह के नटà¥à¤¸, देशी घी आदि मिला होता है) खिलाà¤à¤‚ जाते हैं। ये मां और शिशॠदोनों के लिठफायदेमंद होते हैं। इसी तरह और à¤à¥€ कà¥à¤› हेलà¥à¤¦à¥€ टिपà¥à¤¸ हैं जो डिलिवरी के बाद महिला को अपनाने चाहिà¤, चाहे फिर वह नारà¥à¤®à¤² डिलिवरी (Normal Delivery) हो या सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ (सिजेरियन)। लेकिन इस जानकारी से पहले जान लेते हैं à¤à¤• मां के लिठदेखà¤à¤¾à¤² का कà¥à¤¯à¤¾ महतà¥à¤µ है।
नयी मां के लिठपà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) की जरूरत कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होती है?
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद क़रीब छह महीने के समय को पोसà¥à¤Ÿà¤ªà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤® पीरियड (Postpartum period) कहा जाता है। ये मां के शरीर का पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद रिकवरी फ़ेज़ माना जाता है। इस दौरान नयी मां को देखà¤à¤¾à¤² की जरूरत होती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। इस दौरान मां को अपने बचà¥à¤šà¥‡ को फ़ीड कराना होता है, साथ ही साथ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान आठबदलावों की à¤à¥€ रिकवरी हो रही होती है। सिलिठनयी मां के खानपान से लेकर, सोते-उठने और काम करने को लेकर à¤à¥€ कई तरह की सावधानियां बरतनी पड़ती है। यदि पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद के समय में ये सà¤à¥€ सावधानियां धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से रखी जाà¤à¤‚, तो मां और बचà¥à¤šà¤¾ दोनों सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहते हैं।
इस दौरान नयी मां को शारीरिक और खास तौर पर मानसिक रूप से सपोरà¥à¤Ÿ की जरूरत होती है, इसलिठइस दौरान घर के सà¤à¥€ सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को मां की देखà¤à¤¾à¤² करने की जरूरत होती है।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद परेशानियों (Post delivery Problems) में मां को कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ तकलीफ हो सकती है?
डिलीवरी के बाद महिलाओं को कई तरह की शारीरिक परेशानियों से गà¥à¤œà¤¼à¤°à¤¨à¤¾ पड़ता है। महिला की à¤à¤²à¥‡ ही नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी हà¥à¤ˆ या सीजेरियन (Cesarean), उसके शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं और ये बदलाव अपने साथ परेशनियां à¤à¥€ लाते हैं। इन तकलीफ़ों में कà¥à¤› तकलीफेन शारीरिक होती हैं, तो कà¥à¤› मानसिक। लेकिन दोनों ही तरह से नयी मां को दिकà¥à¤•तों का सामना करना पड़ सकता है। इन तकलीफ़ों में ये समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से देखी जाती है –
डिलीवरी के बाद तनाव (Postpartum depression)
वजायनल इंजरी (योनि का छिलना)
डिलीवरी के बाद योनि में सूखापन
वजायनल इंफ़ेकà¥à¤¶à¤¨ (योनि का संकà¥à¤°à¤®à¤£)
पोसà¥à¤Ÿ डिलीवरी बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग (Post delivery bleeding)
इरà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¯à¥‚लर पीरियडà¥à¤¸ (अनियमित माहवारी)
वज़न में बदलाव (वज़न का बढ़ना)
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की समसà¥à¤¯à¤¾ (सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में ढीलापन)
ये सà¤à¥€ परेशनियां मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से नयी मां को तकलीफ़ दे सकती हैं। लेकिन इसके अलावा और à¤à¥€ कà¥à¤› समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚, जिसे महिलाà¤à¤‚ इतनी तवजà¥à¤œà¥‹ नहीं देती, लेकिन इसे नज़रंदाज़ करना उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤¾à¤°à¥€ पड़ सकता है। इन समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं में –
डिलीवरी के बाद पीठदरà¥à¤¦ (Back pain)
पैरों में सूजन
डिलीवरी के बाद कबà¥à¤œ (Constipation)
तà¥à¤µà¤šà¤¾ संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ (सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤š मारà¥à¤•à¥à¤¸)
बालों की समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ (बालों का à¤à¤¡à¤¼à¤¨à¤¾)
ये à¤à¥€ कà¥à¤› समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हैं, जो महिलाओं को à¤à¥à¤—तनी पड़ सकती है। इसलिठसही देखà¤à¤¾à¤² के ज़रिठऔर सही खान-पान के साथ पूरा आराम कर इन समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से निजात मिल सकता है। आइठअब बात करते हैं नयी मां के लिठदेखà¤à¤¾à¤² से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ टिपà¥à¤¸ की।
फूड कà¥à¤°à¥‡à¤µà¤¿à¤‚ग (Food Craving)
इस बारे में शहानी हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² की डायरेकà¥à¤Ÿà¤° की डाॅकà¥à¤Ÿà¤° संतोष शहानी का कहना है कि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के लिठउचित पोषण (Balance diet) लेना बहà¥à¤¤ जरूरी है। केवल खà¥à¤¦ के लिठही नहीं, बलà¥à¤•ि शिशॠके अचà¥à¤›à¥‡ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥ के लिठà¤à¥€ जरूरी है। उचित पोषण सेफ बाथॠसरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® तरीकों में से à¤à¤• है। पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤¸à¥€ के दौरान जेसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨à¤² डायबिटीज (Gestational diabetes) से बचने के लिठजरूरी है कि आप चीनी का सेवन कम करते हà¥à¤ à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ को अपने पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿ में शामिल करें।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी पीरियड (Pregnancy period) में धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें इन बातों का
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में महिला को अपना पूरा-पूरा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने की जरूरत पड़ती है। जिससे मां और उसके गरà¥à¤ में पल रहे बचà¥à¤šà¥‡ की पूरी तरह देखà¤à¤¾à¤² की जा सके। आइठजानते हैं उन बातों के बारे में, जो à¤à¤• गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को ज़रूर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखनी चाहिà¤à¥¤
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ लेना बहà¥à¤¤ जरूरी है। फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ (folic acid) बचà¥à¤šà¥‡ को कई परेशानियों से बचा सकता है। यह बचà¥à¤šà¥‡ के बà¥à¤°à¥‡à¤¨ और सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² कॉरà¥à¤¡ को विकसित करने में मदद कर सकता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में फलों का सेवन बहà¥à¤¤ जरूरी है लेकिन, कोई à¤à¥€ फल खाने से पहले यह जरूर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि फल अचà¥à¤›à¥€ तरह से धà¥à¤²à¥‡ हà¥à¤ हों। इससे संकà¥à¤°à¤®à¤£ का खतरा कम हो सकता है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान कचà¥à¤šà¥‡ मांस और कचà¥à¤šà¥‡ अंडे के सेवन से à¤à¥€ पहरेज करना चाहिà¤à¥¤ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इनमें मौजूद हानिकारक बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ (Harmful bacteria) गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠकी सेहत को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकते हैं।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में à¤à¤²à¥à¤•ोहॉल (Alcohol) और सिगरेट का सेवन न करें। शराब गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² के माधà¥à¤¯à¤® से बचà¥à¤šà¥‡ के खून में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करके शारीरिक और मानसिक विकास में कई तरह की बाधाà¤à¤‚ पैदा कर सकती है। सिगरेट पीने वालों और सà¥à¤®à¥‹à¤•िंग जोन से à¤à¥€ दूर रहें।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान 11 से 16 किलो तक वजन बà¥à¤¨à¤¾ लाजमी है। इसलिठडायटिंग न करें। à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इस दौरान शरीर में आयरन, फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡, विटामिनà¥à¤¸ और कई तरह के खनिजों और पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी हो सकती है। इसलिठपौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार का सेवन करना जरूरी है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लेकर डायट का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा जा सकता है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान किसी खास चीज को खाने मन होने लगता है। à¤à¤¸à¥‡ में किसी à¤à¤• ही चीज को बार-बार खाने के बजाठबाकी चीजों को à¤à¥€ खाने में शामिल करना चाहिà¤à¥¤ इससे सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ à¤à¥€ बेहतर रहेगा।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान जंक फूड (Junk Food) खाने से परहेज करना ही बेहतर होगा। जंक फूड में फैट की मातà¥à¤°à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है, जिसकी वजह से कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² बढ़ने का खतरा हो सकता है।
इस दौरान अगर फीवर (बà¥à¤–ार) होता है तो जलà¥à¤¦ से जलà¥à¤¦ डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें। फीवर होने की वजह से गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠपर बà¥à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ सकता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान तनाव à¤à¥€ गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠके लिठहानिकारक हो सकता है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में कई कारणों के चलते महिलाà¤à¤‚ तनाव में रहने लगती हैं, जिसका बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत पर बà¥à¤°à¤¾ असर पड़ता है। इसलिठगरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की देखà¤à¤¾à¤² करना बहà¥à¤¤ जरूरी है।
इस दौरान जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तला-à¤à¥à¤¨à¤¾ और मसालेदार खाना खाने से परहेज़ करना चाहिà¤à¥¤ इससे गैस और पेट में जलन (Stomach Irritation) हो सकती है। साथ ही ये कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ को à¤à¥€ बढ़ा सकता है।
इस तरह पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान इन खास बातों को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रख कर अपनी और बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है। आइठअब जानते हैं पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद आपको किन बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने की जरूरत पड़ती है।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postpartum care) में अपनाà¤à¤‚ ये टिपà¥à¤¸
हर मां को पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• और शारीरिक सपोरà¥à¤Ÿ की जरूरत पड़ती हैं, जिसके बारे में घर के अनà¥à¤¯ सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को ज़रूर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिà¤à¥¤ आइठजानते है वो कौन सी टिपà¥à¤¸ है, जिसे हर नयी मां को फ़ॉलो करना चाहिà¤à¥¤
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care): आराम दें खà¥à¤¦ को
नवजात शिशॠकई बार रात में बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग करते हैं, इसलिठमां की नींद à¤à¥€ पूरी नहीं हो पाती है। नींद पूरी हो सके इसके लिठजब à¤à¥€ समय मिले, लेट जाà¤à¤‚। à¤à¤²à¥‡ ही इस दौरान नींद न आठलेकिन, आंखें बंद करके आराम करने से शरीर को आराम मिलेगा और आप रिफà¥à¤°à¥‡à¤¶ फील करेंगी। डिलिवरी के बाद कà¥à¤› महिलाà¤à¤‚ नींद की कमी महसूस करती हैं, à¤à¤¸à¥‡ में अपना मनपसंद मà¥à¤¯à¥‚जिक सà¥à¤¨à¥‡à¤‚। नींद आने में मदद मिलेगी। डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह से पोसà¥à¤Ÿà¤ªà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤® वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करना शà¥à¤°à¥‚ कर सकती हैं। इससे नींद न आने की समसà¥à¤¯à¤¾ कम होगी। जब à¤à¥€ शिशॠदूध पीकर सो जाà¤, आप à¤à¥€ थोड़ी देर सोने की कोशिश करें।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के बाद देखà¤à¤¾à¤² के लिठमां को कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिà¤?
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) के लिठनई मां को आराम करने के अलावा सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार की जरूरत होती है। यूà¤à¤¸à¤¡à¥€à¤ (USDA) और अमेरिका के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और मानव सेवा विà¤à¤¾à¤— के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बनाई गई | MyPlate | (माय पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿ) नà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨ गाइड के हिसाब से पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) के दौरान महिला को ये पांच चीजें अपनी थाली में शामिल करनी ही चाहिà¤à¥¤
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤²
अनाज (grains)
गेहूं, चावल, जई, कॉरà¥à¤¨à¤®à¥€à¤², जौ या अनà¥à¤¯ अनाज से बने खादà¥à¤¯ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥¤ जैसे-बà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤¨ राइस और दलिया।
सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ (vegetables)
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) के लिठमां अपनी डायट में गहरे हरे, लाल और ऑरेंज रंग की सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, फलियां (मटर और बीनà¥à¤¸), और सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤š वाली सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ शामिल करें।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) के दौरान करें फलों (Fruits) का सेवन
डायट में ताजे फल और फलों का जूस शामिल करें। विटामिन सी यà¥à¤•à¥à¤¤ फल जैसे-संतरे, मौसमी आदि खाà¤à¤‚। इसके साथ ही चà¥à¤•ंदर, गाजर खाने से à¤à¥€ आपको अचà¥à¤›à¥‡ परिणाम मिलेंगे। इसके साथ ही बादाम, अखरोट जैसे डà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤«à¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸ को à¤à¥€ अपनी डायट में शामिल करें। ये विटामिन और मिनरलà¥à¤¸ के अचà¥à¤›à¥‡ सोरà¥à¤¸ हैं।
डेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤¸ (Dairy Products)
दूध और दूध से बने कई खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ आहार में शामिल करें। फैट फà¥à¤°à¥€ या कम वसा वाले डेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤¸ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें, जिनमें कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) के दौरान खाने में शामिल करें पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨
चाइलà¥à¤¡ बरà¥à¤¥ के बाद मां को देखà¤à¤¾à¤² के लिठअपने आहार में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ शामिल करना चाहिà¤à¥¤ लो-फैट या लीन मीट के साथ ही नटà¥à¤¸, बीनà¥à¤¸ और फलियों का सेवन करें।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद कà¥à¤¯à¤¾ न खाà¤à¤‚?
गैस बनाने वाली चीजें जैसे गोà¤à¥€ आदि न खाà¤à¤‚।
खटà¥à¤Ÿà¥€ चीजें न खाà¤à¤‚, इससे शिशॠको अपच की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
मसालेदार व तला हà¥à¤† खाना न खाà¤à¤‚।
कॉफी व चॉकलेट कम खाà¤à¤‚।
शराब या सिगरेट का सेवन बिलकà¥à¤² न करें।
बाहर का खाना अवॉयड करें।
कारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿ पेय पदारà¥à¤¥à¤¾à¥‡à¤‚ को अवॉयड करें।
चाइलà¥à¤¡ बरà¥à¤¥ (Child birth) के बाद पानी पीना कितना जरूरी है?
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली महिलाओं को डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का खतरा रहता है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पानी पिà¤à¤‚। इसके अलावा खà¥à¤¦ को हायडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ रखने के लिठनारियल पानी, जूस आदि का à¤à¥€ सेवन कर सकती हैं।
डिलिवरी के बाद खà¥à¤¦ की देखà¤à¤¾à¤² के लिठकराà¤à¤‚ रेगà¥à¤¯à¥à¤²à¤° चेकअप (Regular checkup)
सही खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के सेवन के साथ ही नई मां रेगà¥à¤¯à¥à¤²à¤° चेकअप करवाने की à¤à¥€ आदत डालें। समय-समय पर चेकअप जरूर करवाà¤à¤‚ ताकि हर समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में ही किया जा सके।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) करने के दौरान पेट के घाव की देखà¤à¤¾à¤² कैसे करें?
अगर बचà¥à¤šà¥‡ की डिलिवरी सी सेकà¥à¤¶à¤¨ से हà¥à¤ˆ होगी, तो मां को पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) करने में कई मà¥à¤¶à¥à¤•िलों का सामना करना पड़ सकता है। जब तक टांकें लगे होंगे, तब तक आपको सारी गतिविधियां आपके डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बताठगठनिरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ पर ही करना होगा। हालांकि, टांके खà¥à¤²à¤¨à¥‡ के बाद अगर टांके वाली तà¥à¤µà¤šà¤¾ में कोई दरार या संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई दें, तो इसकी जानकारी अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दें और सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ न करें। लेकिन, अगर टांके हटने के बाद सब सामानà¥à¤¯ है तो आप पहले की तरह सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ कर सकते हैं। हालांकि, कà¥à¤› दिनों तक शॉवर में न नहाà¤à¤‚।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) के दौरान शारीरिक संबंध बनाने के दौरान किन बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤?
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) के दौरान आपको कम से कम छह महीने कर संà¤à¥‹à¤— नहीं करना चाहिà¤à¥¤ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि, पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद महिला की योनि से बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग होती रहती है या फिर उसमें डà¥à¤°à¤¾à¤ˆà¤¨à¥‡à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। साथ ही, हलà¥à¤•ा दरà¥à¤¦ à¤à¥€ होता रहता है। à¤à¤¸à¥‡ में शारीरिक संबंध बनाने के दौरान महिला साथी को अधिक दरà¥à¤¦ और असहज महसूस हो सकता है। इसलिठपà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) के दौरान शारीरिक संबंध के दौरान अधिक जोर न दें न ही अधिक समय तक इसे जारी रखें।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) करने के दौरान किन सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से तà¥à¤°à¤‚त चिकितà¥à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करनी चाहिà¤?
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद देखà¤à¤¾à¤² (Postnatal care) करने के दौरान मां को निमà¥à¤¨ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लकà¥à¤·à¤£ होने पर आपातकालीन चिकितà¥à¤¸à¤¾ जाना चाहिà¤à¤ƒ
लंबे समय तेज और लगातार सिर दरà¥à¤¦ होना
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद अगर कà¥à¤› घंटों से लागतार तेज सिर दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो, तो तà¥à¤°à¤‚त अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° को फोन करें। साथ ही निमà¥à¤¨ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के होने पर आपातकालीन नंबर पर फोन करेंः
देखने में परेशानी होना
बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उलà¥à¤Ÿà¥€ होना
सीने में तेज जलन होना
à¤à¤‚कल में सूजन होना।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान महिलाओं को जितनी देखà¤à¤¾à¤² की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, उतनी ही केयर और पोषण की जरूरत उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद à¤à¥€ पड़ती है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद महिला की शारीरिक और मानसिक हेलà¥à¤¥ की बेहतरी के लिठऊपर बताठगठटिपà¥à¤¸ अपनाने के साथ ही अपनी जरूरत के लिठघरवालों का सहारा लेने में न हिचकिचाà¤à¤‚।
ओवà¥à¤¯à¥‚लेशन कैलकà¥à¤¯à¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤°
अपने पीरियड सायकल को टà¥à¤°à¥ˆà¤• करना, अपने सबसे फरà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² डे के बारे में पता लगाना और कंसीव करने के चांस को बà¥à¤¾à¤¨à¤¾ या बरà¥à¤¥ कंटà¥à¤°à¥‹à¤² के लिठअपà¥à¤²à¤¾à¤¯ करना।
पर डॉ. पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ पाटील के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मेडिकली रिवà¥à¤¯à¥‚ किया गया
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आपके पीरियड सायकल को टà¥à¤°à¥ˆà¤• करें
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कà¥à¤¯à¤¾ आप कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं?
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पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी टालें
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हैलो हेलà¥à¤¥ गà¥à¤°à¥à¤ª हेलà¥à¤¥ सलाह, निदान और इलाज इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ सेवाà¤à¤‚ नहीं देता।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पहला घंटाः कà¥à¤¯à¤¾ करें कà¥à¤¯à¤¾ न करें?
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पहला घंटा जजà¥à¤šà¤¾ और बचà¥à¤šà¤¾ दोनों के लिठही काफी महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होता है। बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पहला घंटा शà¥à¤°à¥‚ होने से पहले पà¥à¤°à¤¸à¤µ के कई चरणों से होकर à¤à¤• बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® होता है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ के सारे चरण कितना समय लेंगे, यह इस बात पर निरà¥à¤à¤° कर सकता है कि महिला की पहली पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी है या दूसरी-तीसरी। अगर यह महिला की पहली पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी है, तो जाहिर की पà¥à¤°à¤¸à¤µ का समय अधिक हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤°à¤¸à¤µ के पहले चरण में महिला की योनि की दीवारों का पतला होना, फैलना, खिंचना और धीरे-धीरे करके बचà¥à¤šà¥‡ के सिर का खिसकने जैसे कारà¥à¤¯ शामिल होते हैं। वहीं, दूसरी बार इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में थोड़ा कम समय लग सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि महिला की योनि पहले के मà¥à¤•ाबले दूसरी बार अधिक ढीली हो गई होती है। इसी तरह तीसरे बचà¥à¤šà¥‡ के पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान यह चरण और à¤à¥€ कम समय का हो सकता है।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पहला घंटा : कैसे होता है बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤®?
पà¥à¤°à¤¸à¤µ अगर नॉरà¥à¤®à¤² डिलिवरी से हो रही है, तो बचà¥à¤šà¤¾ महिला के बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ से होते हà¥à¤ योनि के मारà¥à¤— से जनà¥à¤® लेता है। जनà¥à¤® की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के दौरान सबसे पहले बचà¥à¤šà¥‡ का सिर योनि से बाहर आता है। फिर à¤à¤• कंधा, इसके बाद दूसरा कंधा और फिर इसके बाद बचà¥à¤šà¥‡ का पूरा शरीर महिला की योनि से बाहर निकल जाता है। कà¥à¤› मामलों में पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान बचà¥à¤šà¥‡ के पैर सबसे पहले बाहर आने की à¤à¥€ संà¤à¤µà¤¨à¤¾ हो सकती है। जनà¥à¤® के समय बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤• à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ नà¥à¤®à¤¾ चिकने पदारà¥à¤¥ के अंदर होता है। तो आमतौर पर बचà¥à¤šà¥‡ का सिर बाहर आने से पहले ही योनि के बाहर निकलकर फट जाता है। इसे शो कहते हैं। फटने के बाद इसमें से à¤à¤®à¤¨à¥€à¤“टिक दà¥à¤°à¤µ निकलने लगता है। लेकिन, अगर बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ यानी ऑपरेशन के जरिठहोता है, तो इसके चरण इससे काफी अलग होते हैं।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पहला घंटा : जनà¥à¤® के बाद कà¥à¤¯à¤¾ होता है?
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पहला घंटा कई चरणों से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¤¾ है, जिसमें शामिल हैंः
नाड़ को काटना
जब बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® होता है, तो वह à¤à¤• नाड़ (कोरà¥à¤¡) से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† होता है जिसे नाड़ी à¤à¥€ कहते हैं। इसका रंग सफेद, मटमैला हो सकता है। यह देखने में रसà¥à¤¸à¥€ की तरह होता है। इसे छूकर बचà¥à¤šà¥‡ की धड़कन महसूस की जा सकती है। यह नाड़ मां के गरà¥à¤ में बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर में खून और ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ पहà¥à¤‚चाने का कारà¥à¤¯ करता है। यह नाड़ à¤à¤• सिरे से बचà¥à¤šà¥‡ की नाà¤à¤¿ और दूसरे सिरे पर मां के बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ की दीवार से चिपका रहता है। सामानà¥à¤¯ तौर पर देखा जाठतो जब बचà¥à¤šà¤¾ जनà¥à¤® के बाद रोना शà¥à¤°à¥‚ करता है, तà¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° इसे काटकर मां की बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ से अलग करते हैं। रोना शà¥à¤°à¥‚ करने के बाद बचà¥à¤šà¥‡ की तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ हो जाता है। जो इस बात को साबित करता है कि बचà¥à¤šà¥‡ का दिल और फेफड़े उचित तरीके से कारà¥à¤¯ लगे हैं। इसकी जांच करने के बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° या नरà¥à¤¸ नाड़ को बचà¥à¤šà¥‡ की नाà¤à¤¿ से लगà¤à¤— 8 से 10 सेमी की दूरी पर à¤à¤• कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¥à¤ª लगाकर काट देते हैं। जो अगले 24 घंटे तक बचà¥à¤šà¥‡ की नाà¤à¤¿ से लगी रहकर ही सूखती रहती है। और अगले सात से दस दिनों में यह सूख कर अपने आप ही बचà¥à¤šà¥‡ की नाà¤à¤¿ से अलग हो जाती है।
बचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह और नाक को साफ करना
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के बाद सबसे पहले बचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह और नाक को साफ किया जाता है। अगर बचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह में किसी तरह का कोई पदारà¥à¤¥ चला गया है या जनà¥à¤® के दौरान निकलने वाली à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ का दà¥à¤°à¤µ बचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह में चला गया होता है, तो उसे à¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° या नरà¥à¤¸ साफ करते हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ इन पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को साफ करने के लिठमशीनों का उपयोग किया जा सकता है हालांकि, मशीन का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² तà¤à¥€ किया जाता है, अगर यह पदारà¥à¤¥ बचà¥à¤šà¥‡ की सांस लेने वाली नली में चली गई हो। इसके बाद बचà¥à¤šà¥‡ की आंखों को साफ किया जाता है।
बचà¥à¤šà¥‡ को कपड़े में लपेटना ताकि शरीर का तापमान बना रहे
बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर को अचà¥à¤›à¥‡ से साफ करने के बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤• साफ, मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® और हलà¥à¤•े कपड़े में लपेटते हैं, ताकि, बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर का तापमान बना रहे।
सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की जांच करना
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पहला घंटा शà¥à¤°à¥‚ होते ही डॉकà¥à¤Ÿà¤° बचà¥à¤šà¥‡ के सांस लेने की कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾, बचà¥à¤šà¥‡ के दिल की धड़कन, तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग, हाथ और पैरों का हिलना, बचà¥à¤šà¥‡ की तà¥à¤µà¤šà¤¾ को छूने पर उसका रवैया, इन सà¤à¥€ बातों की देखरेख करते हैं। जिसे à¤à¤ªà¤—ार कहते हैं। अगर बचà¥à¤šà¤¾ पूरी तरह से सामानà¥à¤¯ है, तो इसके बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° बचà¥à¤šà¥‡ के कान के साथ-साथ बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर पर लगे खून या किसी à¤à¥€ दà¥à¤°à¤µ को साफ करते हैं।
à¤à¤ªà¤—ार की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के 1 मिनट और 5 मिनट बाद नवजात शिशॠकी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन करते हैं। जिसे 10 के अंदर सà¥à¤•ोर देते हैं। इनमें शामिल होता हैः
बचà¥à¤šà¥‡ की शारीरिक गतिविधि
बचà¥à¤šà¥‡ की पलà¥à¤¸ दर
बचà¥à¤šà¥‡ का मà¥à¤‚ह बनाना या चिड़चिड़ापन होना
बचà¥à¤šà¥‡ के रंग में होने वाले बदलाव
बचà¥à¤šà¥‡ की सांस लेने की दर
अगर बचà¥à¤šà¥‡ को 7 से 10 के बीच सà¥à¤•ोर मिलता है, तो इसका मतलब है कि बचà¥à¤šà¤¾ पूरी तरह से सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हैं। लेकिन अगर बचà¥à¤šà¥‡ को 4 से 6 के बीच सà¥à¤•ोर मिलता है, तो इसका मतलब हो सकता है कि बचà¥à¤šà¥‡ को ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ लेने में किसी तरह की परेशानी हो सकती है। जिसकी देखरेख करनी जरूरी हो सकती है। लेकिन, अगर बचà¥à¤šà¥‡ को 3 या उससे कम का सà¥à¤•ोर मिलता है, तो इसका मतलब है कि बचà¥à¤šà¥‡ का जीवन जोखिम à¤à¤°à¤¾ है, जिसकी देखरेख करने के लिठमेडिकल केयर और डिवाइस की मदद की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पहला घंटा : नाड़ काटते समय किन बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤?
सबसे पहले, नाड़ को हमेशा बचà¥à¤šà¥‡ की नाà¤à¤¿ से 8 से 10 सेमी की लमà¥à¤¬à¤¾à¤ˆ पर ही काटना चाहिà¤à¥¤
काटने से पहले नापी गई दूरी पर à¤à¤• कà¥à¤²à¤¿à¤ª लगाना चाहिà¤à¥¤ ताकि नाड़ में बाहर की हवा न जा सके और उससे किसी à¤à¥€ तरह का दà¥à¤°à¤µ न टपके।
नाड़ काटने के बाद, बचà¥à¤šà¥‡ की नाà¤à¥€ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हà¥à¤ˆ नाड़ को किसी à¤à¥€ वसà¥à¤¤à¥ के संपरà¥à¤• में आने से बचाना चाहिà¤à¥¤ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हो जाता है और बचà¥à¤šà¥‡ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठजोखिम का कारण बन सकता है।
नाड़ काटने के बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° इस पर दवा लगाते हैं। जब तक यह बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ होती है, हर दिन कीटाणà¥à¤¨à¤¾à¤¶à¤• दवाओं के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से इसकी देखरेख करना जरूरी होता है।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पहला घंटा : बचà¥à¤šà¥‡ का रोना
जनà¥à¤® के बाद बचà¥à¤šà¥‡ का रोनाबहà¥à¤¤ ही जरूरी होता है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि रोना शà¥à¤°à¥‚ करने के बाद ही बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर में ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ और खून का संचार होता है। जिसकी वजह से ही बचà¥à¤šà¥‡ का रंग गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ हो जाता है। जो यह बताता है कि बचà¥à¤šà¥‡ का शरीर उचित तरीके से कारà¥à¤¯ करने लगा है।
जनà¥à¤® के बाद का टीका
इन सारी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के पूरी होने के बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपके बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर में खून के थकà¥à¤•े को ठीक करने और à¤à¤• रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ जैसे गंà¤à¥€à¤° विकारों को रोकने में मदद करने के लिठविटामिन के का इंजेकà¥à¤¶à¤¨ लगा सकते हैं। इसके बाद पिता या परिवार की सहमति से बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® के बाद ही हेपेटाइटिस बी का à¤à¥€ टीका लगा सकते हैं।
शारीरिक जांच करना
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पहला घंटा कैसा होगा यह हर असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² या कà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¿à¤• में अलग-अलग हो सकता है। कà¥à¤› असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ में बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के पहले घंटे के अंदर ही उसकी शारीरिक जांच के तौर पर नवजात शिशॠके बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र या बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ के लेवल की à¤à¥€ जांच की जाती है, जिसके लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° बचà¥à¤šà¥‡ के खून का नमूना लेते हैं।
इसके अलावा, पीकेयू (फेनिलकेटोनà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾) और जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ होने वाली अनà¥à¤¯ बीमारियों की जांच करने के लिठनवजात शिशॠकी सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ कर सकते हैं।
बचà¥à¤šà¥‡ को मां का दूध पिलाना
बचà¥à¤šà¥‡ की शारीरिक जांच लगà¤à¤— 30 से 40 मिनट के अंदर पूरी कर ली जाती है। जिसके बाद बचà¥à¤šà¥‡ को मां के पास दिया जाता है ताकि मां उसे बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग करा सके। इस काम में मां की मदद करने के लिठनरà¥à¤¸ वहां मौजूद हो सकती है।
अगर आपके बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® नॉरà¥à¤®à¤² डिलिवरी से हà¥à¤ˆ है, तो अगले 48 घंटे बाद आप घर आ सकेंगे, लेकिन अगर बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ से हà¥à¤† होगा, तो लगà¤à¤— 96 घंटों के बाद घर जा सकेंगे।
अगर बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® का पहला घंटा कैसा होता है या इससे जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिठआप अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• कर सकते हैं।
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